कांग्रेस सनातन विरोधी है भाजपा सरकार को बदनाम करने के लिए तथाकथित संतों का सहारा ले रही है : अशोक चौधरी…

➡️ शंकराचार्य प्रकरण को लेकर कांग्रेस पर लगाए गंभीर आरोप

राजनांदगांव।

मौनी अमावस्या पर्व के दौरान प्रयागराज संगम क्षेत्र में हुई कथित अव्यवस्था और शंकराचार्य अवीमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद को लेकर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता अशोक चौधरी ने कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कांग्रेस पर सनातन परंपराओं का अपमान करने झूठे नैरेटिव गढ़ने और भाजपा सरकार को बदनाम करने की साजिश रचने का गंभीर आरोप लगाया है।
श्री चौधरी ने कहा कि मौनी अमावस्या जैसे अत्यंत पवित्र और संवेदनशील पर्व पर जहां करोड़ों श्रद्धालु स्नान के लिए एकत्र होते हैं वहां व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से पुलिस प्रशासन द्वारा शंकराचार्य अवीमुक्तेश्वरानंद से मात्र 50 मीटर पैदल चलकर स्नान करने का आग्रह किया गया था। उन्होंने कहा कि इस साधारण प्रशासनिक आग्रह को ठुकराकर मेला परंपराओं का उल्लंघन किया गया और अनावश्यक बवाल खड़ा किया गया जिससे श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर भी खतरा उत्पन्न हो सकता था। उन्होंने ने दावा किया कि इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है जिसमें साफ देखा जा सकता है कि पुलिस अधिकारियों ने आपातकालीन स्थिति के लिए सुरक्षित रखे गए एक पुल को तोड़कर संगम की ओर जाने से रोकने की कोशिश की। इसके बाद रथ के साथ आगे न बढ़ने और पैदल चलने का अनुरोध किया गया जिसे कथित रूप से मानने से इनकार कर दिया गया। यह पूरा घटनाक्रम कांग्रेस पार्टी द्वारा प्रायोजित है, जिसका उद्देश्य भाजपा सरकार और हिंदू परंपराओं को बदनाम करना है। दुनिया जानती है कि कांग्रेस सनातन विरोधी रही है। हिंदुओं को बदनाम करने का कोई मौका वह नहीं छोड़ती और इसके लिए वह तथाकथित संतों का भी सहारा लेती है। वर्ष 2004 का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस शासनकाल में वास्तविक शंकराचार्य पूज्य जयेन्द्र सरस्वती को एक झूठे हत्या मामले में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था, जबकि वे उस समय एक बड़े धार्मिक अनुष्ठान की तैयारी में लगे हुए थे। उस समय कांग्रेस नेताओं के मुंह में दही क्यों जम गया था क्या तब सनातन की चिंता नहीं थी उन्होंने आरोप लगाया कि पूज्य शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती को इसलिए प्रताड़ित किया गया क्योंकि उन्होंने दक्षिण भारत में बड़े पैमाने पर हो रहे धर्मांतरण और ईसाई मिशनरियों की गतिविधियों का खुलासा किया था। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस नेतृत्व विशेष रूप से सोनिया गांधी दक्षिण भारत में ईसाईकरण को बढ़ावा देना चाहती थीं, इसलिए शंकराचार्य को निशाना बनाया गया। अवीमुक्तेश्वरानंद की शंकराचार्य पद की वैधता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब उनसे शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा गया तो उनकी ‘कलई खुल गई’। उन्होंने आरोप लगाया कि वे वास्तव में शंकराचार्य हैं ही नहीं और कांग्रेस अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए ऐसे विवादित साधु-संतों का उपयोग करती है। अंत में कहा कि संत-महात्माओं से अपेक्षा की जाती है कि वे संयम, मर्यादा और परंपरा का पालन करें। उन्होंने दो टूक कहा कि हजारों वर्षों से चली आ रही सनातन परंपराओं का उल्लंघन न तो उचित है और न ही क्षम्य है l