
दंतेवाड़ा बीजापुर मुठभेड़ और बड़े नेताओं के समर्पण से तेज हुई निर्णायक लड़ाई
राजनांदगांवlछत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहा निर्णायक अभियान अब अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। हालिया घटनाक्रम इस बात का स्पष्ट संकेत दे रहे हैं कि राज्य में नक्सलियों की कमर टूट चुकी है। दंतेवाड़ा और बीजापुर में हुई मुठभेड़ों में कई नक्सलियों के मारे जाने और सक्रिय नक्सली नेताओं के समर्पण से यह साबित होता है कि छत्तीसगढ़ तेजी से नक्सलमुक्ति की ओर अग्रसर है।
भाजपा नेता अशोक चौधरी ने कहा कि हाल के दिनों में हुई सुरक्षा बलों की कार्रवाइयाँ नक्सलवाद के अंत का ठोस प्रमाण हैं। उन्होंने बताया कि दंतेवाड़ा में 10 नक्सली मारे गए बीजापुर में 2 नक्सली ढेर किए गएl ये सफलताएँ सुरक्षा बलों की सटीक रणनीति, मजबूत खुफिया तंत्र और सरकार की स्पष्ट नीति का परिणाम हैं। अशोक चौधरी ने यह भी बताया कि छत्तीसगढ़ में सक्रिय कुख्यात नक्सली नेता देवा ने अपने 20 साथियों और हथियारों के साथ हैदराबाद में समर्पण कर दिया है।
यह घटना नक्सल संगठन के भीतर बढ़ते भय और टूटते मनोबल को दर्शाती है। केंद्रीय स्तर के नक्सली नेताओं का इस प्रकार आत्मसमर्पण करना सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता मानी जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा की गई यह घोषणा कि 31 मार्च 2026 तक भारत को पूरी तरह नक्सलमुक्त किया जाएगाl अब जमीन पर साकार होती नजर आ रही है। छत्तीसगढ़ इस राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है और लगातार निर्णायक बढ़त बना रहा है। इस पूरे अभियान में छत्तीसगढ़ शासन के गृह मंत्री विजय शर्मा की भूमिका को भी विशेष रूप से सराहा जा रहा है। उन्होंने लगातार नक्सल प्रभावित इलाकों का दौरा कर सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ाया
जमीनी हालात की समीक्षा की और नक्सलियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने में सफलता हासिल की।
उनकी सक्रियता के चलते नक्सल संगठन के शीर्ष नेताओं को भी समर्पण के लिए मजबूर होना पड़ा। श्री चौधरी ने कहा कि भाजपा शासन में हमेशा नक्सलवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई गई है। इसी कारण नक्सली संगठनों द्वारा चुनावों के दौरान भाजपा का विरोध और कांग्रेस के समर्थन की खुली घोषणाएँ की जाती रही हैं। अंत में उन्होंने कहा कि चाहे जो भी राजनीतिक बयानबाजी हो, लेकिन सच्चाई यही है कि भारत नक्सलमुक्त होने जा रहा है। आतंकवाद और नक्सलवाद के खात्मे के वर्ष के रूप में याद किया जाएगा जो देश की आंतरिक सुरक्षा और विकास के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी।
